विज्ञानमयः जीवन जीने की कला
आध्यात्मयः परम जीवन जीने की कला |
क्योंकि हम सुनते है कि आत्मा क्या है खोजें :- लेकिन  जब  तक हम यह न जान ले कि यह शरीर क्या है तब तक हम आत्मा को न खोज पायेंगे | यही बड़ी वैज्ञानिक खोज है |
यह शरीर क्या है ? और शरीर अगर एक ही होता तो आसान था | हमारे भीतर पांच शरीर है | उपनिषदों ने हमारे शरीर के पर्दों को पांच हिस्सों में विभाजित किया है | ऊपर जो दिखाई पड़ता है वह 'अन्नंमय' शरीर है, उसके पीछे छिपा हुआ जिसे पश्चिम के वैज्ञानिक अब 'बायो-इनर्जी ' कहते है |जीव-ऊर्जा उसे पूरब ने 'प्राण' कहा है ... शक्ति शरीर है, उर्जा का शरीर - इस शरीर के ठीक भीतर दूसरी पर्त पर | उसके पीछे 'मनोमय' शरीर है - मन का | जिन्होने भीतर प्रवेश यात्रा की है, वे जानते है कि मन भी एक शरीर है | शरीर का कुल मतलब इतना होता है कि उसके भी एक पर्त से हम घिरे हैं - इम्बादिड, उसकी भी एक पर्त हमें घेरे हुए है | मन के भी पीछे एक और शरीर है जिसे 'विज्ञानमय' शरीर कहा है |  जिसको हम 'कान्श्सेसनेस' कहते है, विज्ञान कहते है |  यह वो ज्ञान की छमता है भीतर वह भी एक शरीर है | उसके पीछे और एक शरीर उपनिषद मानते है, उसे वे 'आनन्दमय शरीर' कहते है - बिलास बाडी | तो वह जो हमें इस जीवन में सुख की झलक कही से मिलती है, वह हमारे आनन्दमय शरीर की घटनाये है | 
ये पांच शरीर है, इन पांच के पीछे हमारी अशरीरी आत्मा है |
  "जीवन और महाजीवन प्रकृति का हिस्सा है परम जीवन हमारा चुनाव है | हमारी स्वतंत्रता है | मगर परम जीवन की साधना जीवन में ही संभव है | अतः कह सकते है की परम जीवन की साधना का ही दूसरा नाम है अध्यात्म |"  
योग है अध्यात्म का विज्ञान, योग है समाधि का विज्ञान, योग है स्वस्थित होने का विज्ञान-शरीर है, शरीर के भीतर मन है, मन के भीतर आत्मा है | शरीर से आत्मा तक की दूरी कैसे तय करे इसका नाम है योग | 
योग से सम्बन्ध :-
योग की अनेक पगदंदियाँ हैं | अलग - अलग चक्रों से हम अपने केंद्र तक यात्रा कर सकते हैं | सात चक्रों की चुर्चा आपने सुनी होगी |  मुसलाधार चक्र, उसके ऊपर स्वाधिष्ठान चक्र है, उसके ऊपर मरिपुर चक्र है, उसके ऊपर अनाहत चक्र है | फिर विशुध्द्ही चक्र है फिर आज्ञा चक्र है, फिर सहस्रार चक्र है | अलग-अलग चक्रों से जब हम अपने केंद्र की ओर चलते है तो उसका नाम योग है | चुकिं चेतना  के मुख्य सात केंद्र है | अतः योग के भी मूलतः सात ही प्रकार है :- कर्मयोग,  तंत्रयोग, हठयोग, भक्ति योग, ज्ञान योग, ध्यान योग और सांख्य योग | ये सातो योग चेतना के सातों केन्द्रों से क्रमशः सम्बंधित हैं | योग के मुख्यतः चार विभाग किये जा सकते हैं |

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